इस्लाम में ब्याज का निषेध केवल एक वित्तीय नियम नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक सिद्धांत है जो सामाजिक न्याय और समुदाय की भलाई को बढ़ावा देता है। इस्लामी वित्त के सिद्धांतों के अनुसार, ब्याज-आधारित लेन-देन उधारकर्ताओं के लिए आर्थिक कठिनाइयाँ पैदा कर सकता है, जबकि दान और सहानुभूति पर आधारित वित्तीय व्यवस्थाएँ समाज में करुणा और भाईचारे को बढ़ावा देती हैं। इस पॉडकास्ट में, हम ब्याज के निषेध के पीछे के धार्मिक और सामाजिक तर्कों की खोज करेंगे और यह समझेंगे कि कैसे इस्लामिक वित्तीय प्रथाएँ समुदाय के सभी ...